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पत्नी ने पति पर किया दहेज प्रताड़ना का केस, पति ने खोली ‘धारा 498 ए’ के नाम की चाय की Shop

पत्नी ने पति पर किया दहेज प्रताड़ना का केस, पति ने खोली 'धारा 498 ए' के नाम की चाय की Shop

आत्मविश्वास या घमंड – आज की कुछ लड़कियाँ

आजकल कुछ लड़कियाँ अपने आप को इस तरह प्रस्तुत करती हैं जैसे उनके बराबर कोई नहीं है। वे खुद को हर क्षेत्र में सर्वोच्च मानती हैं, भले ही वास्तविकता कुछ और हो।


शादी और व्यवसाय की सफल शुरुआत

ऐसा ही एक मामला सामने आया है। एक लड़के की शादी 2018 में हुई थी। शादी के बाद पति-पत्नी ने मिलकर मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू किया, जो काफ़ी सफल रहा और उन्होंने आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता हासिल की।


498A का झूठा आरोप और जिंदगी का मोड़

लेकिन 2022 में उस लड़के पर उसकी पत्नी ने दहेज का झूठा आरोप लगाते हुए IPC की धारा 498A के तहत केस दर्ज करवा दिया। जबकि उसने कभी दहेज माँगा भी नहीं था। इस आरोप के कारण उसकी आर्थिक और मानसिक स्थिति बुरी तरह से प्रभावित हुई।


न्याय की तलाश में संघर्ष

मामला नीमच जिले के एक थाने में दर्ज हुआ था। उस हादसे के बाद लड़का राजस्थान की एक लड़की से दोबारा शादी करके वहीं ससुराल के पास एक चाय का ठेला लगाने लगा। उसने अपने ठेले पर लिखा:
“498A चाय – जब तक नहीं मिलेगा न्याय, तब तक उबलती रहेगी चाय।”
इस तरह वह अपने संघर्ष और दर्द को समाज के सामने रख रहा है।


माँ के लिए संघर्ष करता बेटा

उसकी माँ बोलने में असमर्थ हैं और आर्थिक रूप से भी बहुत कमजोर हैं। वह बेटा अब सिर्फ अपनी माँ के लिए जी रहा है। उसने हाथों में हथकड़ी पहने हुए भी चाय बनाना जारी रखा है। यह उसकी हिम्मत और न्याय की भूख को दर्शाता है।


क्या ऐसे व्यक्ति को न्याय नहीं मिलना चाहिए?

सवाल उठता है – क्या ऐसे व्यक्ति को न्याय नहीं मिलना चाहिए? अगर पति दोषी है तो उसे सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन अगर पत्नी झूठ बोल रही है तो उसे भी सज़ा मिलनी चाहिए। झूठ के बल पर कोई महान नहीं बन सकता।


सच्चाई कड़वी होती है लेकिन टिकाऊ होती है

सच्चाई हमेशा कड़वी होती है, लेकिन सच्ची और टिकाऊ होती है। लोग सच्चाई से इसलिए भागते हैं क्योंकि वह उनकी असलियत उजागर कर देती है। जैसे-जैसे झूठ सामने आता है, वैसे-वैसे उनका नकाब उतरता है।


झूठे केस से बर्बाद होती ज़िंदगियाँ

ऐसी ही घटनाएँ हमारे देश में कई लोगों की ज़िंदगी बर्बाद कर रही हैं। न्याय मिलने में देरी हो रही है और सच्चे लोग झूठे मामलों में फँसकर दर-दर भटक रहे हैं। यह समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

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